Double Marker Test : डबल मार्कर टेस्ट क्या है?

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Double Marker Test

डबल मार्कर टेस्ट क्या है?

डबल मार्कर टेस्ट (Double Marker Test)?


डबल मार्कर टेस्ट (Double Marker Test) मां के पेट में पल रहे भ्रूण पर किसी भी तरह के क्रोमोसोमल असमानता का पता लगाने के लिए किया जाता है। यह टेस्ट प्रेग्नेंसी के शुरुआती तीन महीनों के दौरान किया जाता है, अगर भ्रूण में किसी तरह की क्रोमोसोमल ( Chromosomal ) असामान्यताएं होती है , तो उसकी पहचान करने में यह मददगार होता है।

प्रति 700 बच्चों के जन्म में 1 बच्चा इससे पीड़िता होता है। यह परीक्षण आपको यह पता लगाने में मदद करता है , कि क्या आपके बच्चे को डाउन सिंड्रोम, ट्राइसॉमी 18 और 21 जैसे मानसिक विकार का खतरा है या नहीं। ये विकार क्रोमोसोमल दोष के कारण होते हैं। जो जन्म के बाद बच्चे के लिए गंभीर समस्याएं पैदा कर सकती हैं।

यह परीक्षण मूल रूप से खून में दो प्रकार के मार्करों की जांच करता है।

  1. फ्री बीटा एचसीजी (Free Beta HCG)
  2. पीएपीपी-ए (गर्भावस्था संबद्ध प्लाज्मा प्रोटीन) (PAPP-A)

1 . फ्री बीटा एचसीजी (Free Beta HCG) :-


अगर भ्रूण में विकार का उच्च स्तर पाया जाता है , तो यह डाउन सिंड्रोम के जोखिम को दर्शाता है । और ट्राइसॉमी 18 और 21 का भी निम्न स्तर बताने में मददगार होता है।

2. पीएपीपी-ए (गर्भावस्था संबद्ध प्लाज्मा प्रोटीन) (PAPP-A) :-


यह भ्रूण के खून में निम्न स्तर में प्लाज्मा प्रोटीन की उपस्थिति में डाउंस सिंड्रोम के जोखिमों का पता लगाती है।

Double Marker

Double Marker Test
Double Marker Test

इस पोस्ट के अंतर्गत निम्न विषयों को शामिल किया गया है, जिन्हें आप विस्तार रूप से पढ़ सकते हैं, जिनकी सूची नीचे दी गई है :-

डबल मार्कर टेस्ट क्या है ? What is Double Marker test in Hindi?

डबल मार्कर टेस्ट क्यों किया जाता है ?

डबल मार्कर टेस्ट कैसे किया जाता है?

डबल मार्कर टेस्ट के ख़तरे और दुष्प्रभाव क्या हैं?

डबल मार्कर टेस्ट के परिणाम की व्याख्या कैसे की जाती है?

डबल मार्कर टेस्ट की सटीकता?

Dual marker test in pregnancy in Hindi

डाउन सिंड्रोम: 

डाउन सिंड्रोम को Trisomy 21 के रूप में भी जाना जाता है। यह टेस्ट गर्भवती महिला के खून से किया जाने वाला खून का /ब्लड टेस्ट है। जिसकी मदद से हम अजन्‍में बच्‍चे में डाउन सिंड्रोम का आसानी से पता लगा सकते है। दूसरी और विशेषग्यों का मानना है कि गर्भपात के मामलों में बढ़ोतरी होने से यह बहुत ही विवादास्पद हो सकता है। डाउन सिंड्रोम एक आनुवांशिक विसंगति है जो बच्चे के सामान्य शारीरिक विकास को प्रभावित करता है। यह बीमारी बच्चे के गर्भ में रहने के दौरान ही बन जाती है और इससे ग्रस्त करीब 15% बच्चे पहले साल के अंदर ही मौत का शिकार बन जाते हैं। सान दिआगो स्थित एक स्वास्थ्य रक्षक फर्म के रिसर्चर्स के अनुसार इस जाँच का एक आसान तरीका निकाला गया है, जिससे गर्भ में पल रहे बच्चे का इस विसंगति से ग्रस्त होने का सटीक पता लग सकता है। डाउन सिंड्रोम के साथ निम्नलिखित विशेषताएं हो सकती हैं:

  • असामान्य चेहरे की विशेषताएं, तिरछी आँखें और छोटे कान
  • दृष्टि समस्या
  • विलंबित विकास और बौद्धिक परेशानी का होना।
  • फेफड़ों के उच्च रक्तचाप के खतरे का बढ़ना और दिल की बीमारी का होना।
  • थायरॉयड समस्याएं
  • दोरे पड़ने
  • कम मांसपेशियों टोन
  • महिलाओं की उच्चतर उम्र से उसके होने वाले बच्चे में डाउन सिंड्रोम के होने की संभावना रहती है। इसलिए 35 साल की उम्र से अधिक गर्भवती महिलाओं को निश्चित रूप से Double Marker टेस्ट ज़रूर करवाना चाहिए

Trisomy 18

Trisomy 18 भी ( Edwards Syndrome ) के रूप में जाना जाता है, भ्रूण डीएनए में क्रोमोसोम 18 की अन्य कॉपी इस गंभीर बीमारी का कारण बनती है। एडवर्ड्स सिंड्रोम के साथ पैदा हुए बच्चे अधिकांश अपनी प्रारंभिक अवस्था में ही मर जाते हैं। लगभग , जो बच्चे जीवित रहते हैं वह गंभीर रूप से मानसिक विकलांग के साथ रहते हैं। एडवर्ड्स सिंड्रोम का कोई इलाज नहीं है और लक्षणों का प्रबंधन करना मुश्किल हो जाता है। एडवर्ड्स सिंड्रोम के साथ बच्चे को नियमित रूप से संक्रमण और हृदय की समस्याओं के लिए निरीक्षण किया जा रहा है।

डाउन सिंड्रोम की तरह, बच्चों का एडवर्ड्स सिंड्रोम के साथ पैदा होने की संभावना महिलाओं की उम्र के साथ बढ़ जाती है। इसलिए गर्भावस्था को जारी रखने के लिए वृद्व महिलाओं को ख़तरों की पहचान करने के लिए डबल मार्कर स्क्रीनिंग के लिए ज़रूर जाना चाहिए। यह टेस्ट ज़्यादातर उन महिलाओं को करवाने के लिए सिफारिश किया गया है, जो :

  • जो महिलाएं 35 साल की उम्र से बड़ी होती हैं।
  • जन्म दोष का कोई पारिवारिक इतिहास हो।
  • मधुमेह हो।
  • उच्च स्तर की विकिरण का प्रदर्शन किया हो।
  • जिन महिलाओं को उपरोक्त में से कोई भी समस्या नही है , लेकिन वह तब भी खतरों का आकलन और परिणाम स्वरूप तैयारी करने के लिए Double Marker टेस्ट चुन सकती हैं ।
  • गर्भावस्था के दौरान वायरल संक्रमण हुआ हो।

Double Marker Test in Hindi

डबल मार्कर टेस्ट क्यों किया जाता है (Double Marker Test)?

  • यह परीक्षण जरूरी सावधानियों को बरतने में मदद करता है, ताकि बच्चे का जन्म बिना किसी अमान्यता के हो सके।
  • आपकी उम्र 35 से अधिक है , और आप बच्चे की प्लानिंग कर रहे हैं तो यह टेस्ट आपके लिए बहुत जरूरी है। क्योंकि बढ़ती उम्र के मां-पिता के बच्चों में क्रोमोसोमल chromosomal असंतुलन होने का खतरा अधिक बना रहता है।

डबल मार्कर टेस्ट कराने से पहले ध्यान देने योग्य बातें ?

डबल मार्कर टेस्ट से पहले निम्नलिखित बातों का ध्यान रखना जरूरी है :-

  • अपनी मेडिकल हिस्ट्री के बारे में डॉक्टर को हर जानकारी दें।
  • अगर आप किसी अन्य दवा का इस्तेमाल करते हैं तो अपने डॉक्टर को इसके बारे में बताएं।
  • इस टेस्ट काफी महंगा है यही कारण है कि इस टेस्ट की सिफारिश डॉक्टर तभी करते हैं जब उन्हें व्यक्ति की स्थिती गंभीर मालूम होती है।
  • इस टेस्ट की सटीकता आपके डॉक्टर के कुशल अनुभव और टेस्ट के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले उपकरणों पर निर्भर करती है। हालांकि, यह टेस्ट खर्चीली होती है। इसलिए, यह टेस्ट करवाना हर किसी के लिए संभव नहीं होता है।
  • उच्च लागत और महंगे उपकरणों की जरूरतों के कारण, ये परीक्षण देश के सभी शहरों में उपलब्ध नहीं हैं, आपको इस टेस्ट की जरूरत है या नहीं, इसकी जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से संपर्क करें।

प्रक्रिया ( Process of Double Marker Test )

कैसे करें डबल मार्कर टेस्ट की तैयारी?

इस टेस्ट के लिए किसी भी तरह की तैयारी की आवश्यकता नहीं होती है , अगर आपका इस टेस्ट से जुड़ा कोई सवाल है तो आप अपने डॉक्टर से संपर्क करें।

कैसे किया जाता है डबल मार्कर टेस्ट?

  • इस टेस्ट के लिए प्रेग्नेंट महिला का अल्ट्रा साउंड टेस्ट औऱ ब्लड टेस्ट किया जाता है।
  • यह टेस्ट बड़ी प्रयोगशालाओं में किया जाता है।
  • एक बार खून के नमूने प्राप्त करने के बाद दो और मुख्य टेस्ट किए जाते हैं।
  • जिसमें डॉक्टर महिला के शऱीर में हार्मोन और प्रोटीन की जांच करते हैं। हार्मोन फ्री बीटा ह्यूमन कोरियोनिक गोनाडोट्रॉफ़िन है।
  • यह ग्लाइकोप्रोटीन हार्मोन प्रेग्नेंसी के दौरान गर्भ के नाल द्वारा विकसित किया जाता है।
  • दूसरे टेस्ट, प्रोटीन को PAPP-A या गर्भावस्था-संबद्ध प्लाज्मा प्रोटीन-A के रूप में किया जाता है। यह गर्भवती महिलाओं के लिए बेहद महत्वपूर्ण प्रोटीन होता है।

डबल मार्कर टेस्ट के बाद क्या होता है?

  • इस टेस्ट के बाद किसी विशेष प्रकार की देखभाल की जरूरत नहीं होती है, आप अपने डॉक्टर द्वारा निर्देशित तरीके पर अपनी दैनिक गतिविधियों को फिर से शुरू कर सकते हैं।
  • अगर आपके मन में डबल मार्कर टेस्ट के बारे में जुड़ा कोई सवाल है, तो कृपया अपने निर्देशों को बेहतर ढंग से समझने के लिए अपने डॉक्टर से तुरंत परामर्श करें।

डबल मार्कर टेस्टDouble Marker के ख़तरे और दुष्प्रभाव क्या हैं?

  • Double Marker टेस्ट मां के रक्त से किया जाने वाला परीक्षण है जिसके कारण उनके भ्रूण को कोई ख़तरा नही होता है। इससे गर्भपात या अन्य गर्भावस्था संबंधी जटिलताओं का कोई खतरा नहीं है।
  • इंजेक्शन वाली जगह पर छोटी सी खरोंच आ सकती है।
  • बहुत कम मामलों में, नस में सूजन हो सकती है। जिसे दिन में एक दो बार सिकाई करके सही कर सकते है।
  • अगर आप रक्तस्राव या थक्के जैसी समस्या से पीड़ित हैं या एस्पिरिन की तरह रक्त पतला करने की दवा लेते हैं, तो खून का नमूना लेने से पहले अपने डॉक्टर को ज़रूर बताएं।

परिणामों का स्पष्टीकरण

परिणामों का क्या मतलब है?

डबल मार्कर टेस्ट के परिणाम आमतौर पर दो श्रेणियों में आते हैं :-

  • स्क्रीन सकारात्मक
  • स्क्रीन नकारात्मक
  • ये परिणाम न केवल ब्लड टेस्ट बल्कि महिला की उम्र, अल्ट्रासाउंड के दौरान भ्रूण की उम्र पर निर्भर करता है। ये सभी कारक टेस्ट के परिणाम को विकसित करने में सबसे अहम होते हैं , क्योंकि 35 साल से अधिक उम्र की महिलाओं में युवा महिलाओं की तुलना में उनके भ्रूण के तंत्रिका संबंधी विकार विकसित होने की संभावना अधिक हो सकती है।
  • टेस्ट के परिणाम अनुपात के रूप में बताए जाते हैं , जिसके तहत 1:10 से 1: 250 के अनुपात को ‘ स्क्रीन पॉजिटिव ‘ परिणाम माना जाता है। जो भ्रूण के लिए उच्च जोखिम वाला माना जाता है। जबकि, 1:1000 या उससे अधिक के अनुपात को ‘स्क्रीन नेगेटिव ‘ कहा जाता है, जिसके परिणामस्वरूप भ्रूण अधिक सुरक्षित होता है।
  • ये अनुपात विकार से पीड़ित बच्चे की संभावना को समझने का संकेत देते हैं, प्रत्येक अनुपात में गर्भधारण की संख्या से अधिक बच्चे में विकार होने की संभावना को दर्शाया जाता है। 1:10 अनुपात का मतलब है कि 10 गर्भधारण में से 1 बच्चे में विकार की संभावना हो सकती है, जिसका खतरा भी अधिक रहता है। वहीं, 1:1000 अनुपात का मतलब है कि 1000 गर्भधारण में से 1 बच्चे में यह विकार हो सकता है। जिसकी संभावना बहुत ही कम होती है।
  • अनुपात के आधार पर, डॉक्टर आपको आगे के डायग्नोस्टिक्स, मुख्य रूप से एमनियोसेंटेसिस या कोरियोनिक विलस सैंपलिंग करने की सलाह दे सकते हैं। अगक आपके डबल मार्कर टेस्ट के परिणाम सकारात्मक आते हैं तो।
  • प्रयोगशाला और अस्पताल के आधार पर, डबल मार्कर टेस्ट के लिए लागत अलग-अलग हो सकती है। इससे जुड़ी अधिक जानकारी के लिए कृपया अपने डाक्टर से परामर्श करें।

Double Market Test Cost

Double Marker टेस्ट की कीमत

डबल मार्कर टेस्ट कॉस्ट

भारत के विभिन्न शहरों में डबल मार्कर टेस्ट की कीमत अलग अलग है :-

  • चेन्नई में डबल मार्कर टेस्ट की कीमत = ₹ 1200
  • दिल्ली में डबल मार्कर टेस्ट की कीमत = ₹ 1425
  • नोएडा में डबल मार्कर टेस्ट की कीमत = ₹ 1425
  • मुंबई में डबल मार्कर टेस्ट की कीमत = ₹ 1460
  • हैदराबाद में डबल मार्कर टेस्ट की कीमत = ₹ 1200
  • बैंगलोर में डबल मार्कर टेस्ट की कीमत = ₹ 1200

हम आशा करते हैं आपको हमारा यह पोस्ट आपके लिए काफी लाभदायक साबित हो । इस आर्टिकल में डबल मार्कर टेस्ट से जुड़ी ज्यादातर जानकारियां देने की कोशिश की है, जो आपके काफी काम आ सकती हैं। अगर आप प्रेग्नेंसी के पहले फेज में हैं तो डॉक्टर आपको यह टेस्ट लिख सकता है। बस इस बात का ध्यान रखें कि प्रेग्नेंसी में मां को केयर की जरूरत होती है। इस दौरान उन्हें अपने साथ-साथ गर्भ में पल रहे बच्चे का भी ध्यान रख रखना होता है। हमारे इस पोस्ट पढ़ने के लिए आपका धन्यवाद , इस पोस्ट को और भी जरुरत मंद के साथ शेयर करें। और इसी तरह की HEALTH TIPS के लिए हमारे साथ जुड़े रहे ।

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