गठिया क्या है ? गठिया के लक्षण, कारण, निदान, उपचार और आहार – व्यायाम के बारे में जानें | Arthritis in Hindi | Arthritis Kya Hai

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नमस्कार दोस्तों आज हम आपको गठिया (arthritis) Arthritis in Hindi | Arthritis Kya के बारे में बताने वाले हैं? – गठिया यानी Arthritis बीमारी आज एक सामान्य बीमारी की तरह हो चुकी है , गठिया (arthritis) पुरुषों की तुलना में महिलाओं में ज़्यादा होता है। आज हम आपको गठिया क्या है ? गठिया के लक्षण, गठिया के कारण , उपचार और आहार और व्यायाम के बारे में सब कुछ बताएँगे विि्तार से , ताकि आपको इसकी जानकारी हो जाए और आपके आस-पास अगर किसी को गठिया ( Arthritis ) की समस्या हो तो आप उसकी मदद कर सकेंगे ।

Arthritis Kya Hai

What is arthritis – गठिया क्या है?

गठिया (arthritis) एक बीमारी है , जो प्रायः जोड़ों (Joints ) में होती है। यह जोड़ों ( Joints ) का रोग है। इस बीमारी में जोड़ों में कई परिवर्तन होते हैं, जिससे जोड़ों की हड्डियों का क्षरण होने लगता है। जिसके परिणाम स्वरूप जोड़ों में दर्द और सूजन होने लगती है। गठिया (arthritis) के कारण हमारी हड्डियों की संधियों ( Bone joints ) में विकृति उत्पन्न हो जाती है। जिसके कारण इंसान का चलना-फिरना, सामान्य काम करना भी मुश्किल होने लगता है ।

जोड़ों में सूजन ( Swelling in Joints ) और दर्द होने पर गठिया (arthritis) माना है। गठिया (arthritis) किसी एक जोड़ या एक साथ कई जोड़ों को प्रभावित कर सकता है। 100 से अधिक प्रकार के arthritis होते हैं , सबसे ज़्यादा होने वाले गठिया (arthritis) दो हैं :- पहला – ऑस्टियोआर्थराइटिस (Osteoarthritis या OA) और दूसरा रुमेटीइड गठिया (Rheumatoid Arthritis या RA) हैं।

समय के साथ साथ गठिया के लक्षण ज़्यादा होने लगते हैं, लेकिन वे अचानक भी प्रकट हो सकते हैं। गठिया सबसे अधिक 6० वर्ष से अधिक उम्र के वयस्कों में देखा जाता है, लेकिन यह बच्चों, किशोर और छोटे वयस्कों में भी विकसित हो सकता है। पुरुषों की तुलना में महिलाओं में , इनमे से भी ज़्यादातर अधिक वजन वाली महिलाओं में गठिया होना आम बात है।

गठिया का क्या कारण है? Arthritis Causes?

कार्टिलेज (Cartilage) जोड़ों में एक फर्म लेकिन लचीला संयोजी ऊतक (flexible connective tissue) होता है। इंसान जब चलते हैं, तो ये संयोजी ऊतक दबाव और झटके को अवशोषित करके जोड़ों की रक्षा करते हैं। और जोड़ों का तनाव कम करते हैं। इसी उपास्थि ऊतक (cartilage tissue) की सामान्य मात्रा में कमी गठिया ( arthritis )के कुछ रूपों का कारण होती है।

जोड़ों में संक्रमण या चोट, उपास्थि ऊतक के टूटने का कारण बनती है। यदि आपके परिवार में किसी को पहले यह बीमारी रही हो जैसे की मम्मी पापा को तो आपमें Osteoarthritis होने का जोखिम अधिक हो सकता है।

गठिया का एक और सामान्य रूप Rheumatoid arthritis, एक ऑटोइम्यून विकार है, यह तब होता है, जब आपके शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली (immune system) शरीर के ऊतकों पर हमला करती है , ये हमले जोड़ों के सॉफ़्ट ऊतक सिनोवियम (synovium) को प्रभावित करते हैं। synovium एक द्रव पैदा करता है, जो उपास्थि को पोषण देता है और जिससे जोड़ों में चिकनाई बनी रहती है।

Rheumatoid arthritis, सिनोवियम (synovium) की बीमारी है, इससे हड्डियों के जोड़ पूरी तरह ख़राब हो सकते हैं। Rheumatoid arthritis, हड्डी के जोड़ों और उपास्थि दोनों के नष्ट होने का कारण बन सकता है।

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Arthritis Symptoms – गठिया के लक्षण क्या हैं?

  • जोड़ों का दर्द, जकड़न और सूजन गठिया के सबसे आम लक्षण हैं।
  • जोड़ों के आसपास की त्वचा में लालिमा आ जाती है यानी जोड़ों के आस पास त्वचा का रंग लाल हो जाता है
  • गठिया होने पर चलने-फिरने में भी दिक़्क़तें होने लगती हैं।
  • जिनको गठिया होता है उन्हें सुबह के समय, जब वो बिस्तर से उठते हैं उस समय असहनीय दर्द जोड़ों में होता है। साथ में जकड़न महसूस करते हैं।
  • प्रतिरक्षा प्रणाली की गतिविधि के कारण जोड़ों में सूजन होना और भूख की कमी हो जाती है।
  • Rheumatoid Arthritis यानी RA के मामले में, मरीज़ थका हुआ महसूस करता है।
  • एनीमिया की समस्या भी हो सकती है यानी ख़ून में लाल रक्त कोशिका (RBCs) की संख्या कम हो जाती है।
  • इसमें हल्का बुखार रहता है।
  • अगर इसका सही समय पर इलाज ना करवाया जाए तो, यह एक गम्भीर समस्या बन जाती है जिससे आपके हड्डियों के जोड़ हमेशा के लिए ख़राब हो सकते हैं और इसके बाद इनका सिर्फ़ एक ही इलाज बचता है प्रत्यारोपण करवाना , इसलिए समय पर सही उपचार जरूर ले ।

गठिया की पहचान कैसे की जाती है? How is arthritis diagnosed?

Arthritis in Hindi


यदि आप गठिया का पता लगाना चाहते हैं , तो अपने आस पास के किसी डॉक्टर से चेक करवाएँ। डॉक्टर आपके जोड़ों की जाँच करके पता लगा सकते हैं , कि आपको गठिया है या नही? वो इसके लिए आपके जोड़ों के पास त्वचा लाल है कि नही ये भी चेक करेंगे। इसके अलावा जोड़ों के आसपास के fluid की जांच करेंगे, साथ में आपके चलने फिरने का भी टेस्ट करेंगे। इतना सब टेस्ट होने के बाद अगर आपको गठिया हुआ और ज़रूरी हुआ तो डॉक्टर ख़ुद ही बता देंगे की आपको गठिया के विशेषज्ञ “Rheumatologist Doctor” के पास जाना चाहिए।

लेकिन यदि आपको पता है की गठिया है और आप इसके गंभीर लक्षणों का अनुभव कर रहे हैं, तो आपको किसी rheumatologist (रुमेटोलॉजिस्ट) डॉक्टर से तुरंत मिलना चाहिए। rheumatologist (रुमेटोलॉजिस्ट) डॉक्टर ही गठिया का बेहतर निदान और उपचार कर सकते हैं।

रक्त (blood) और joint (जोड़ों) के fluids को निकाल कर चेक करने के बाद ही डॉक्टर यह निर्धारित कर सकते हैं की मरीज़ को किस तरह का गठिया है।

गठिया के रक्त परीक्षण (Blood Test) में विशिष्ट प्रकार के एंटीबॉडी जैसे की Anti-CCP (एंटी-साइक्लिक सिट्रुलिनेटेड पेप्टाइड), ANA (एंटिनाक्लियर एंटीबॉडी) और RF (Rheumatoid Factor) की जांच करके पता लगाया जाता है।

हड्डियों और उपास्थि की हालत देखने के लिए, डॉक्टर आमतौर पर X-ray, MRI और CT Scans जैसे तरीक़ों का इस्तेमाल करते हैं। ऐसा इसलिए किया जाता है ताकि पता लगाया जा सके कि , जोड़ों की हालत कैसी है और लक्षणों के अन्य कारणों का भी पता लगाया जा सके।

Arthritis FAQ’S ???

गठिया किस उम्र में शुरू होता है?

सामान्यतः गठिया ( Arthritis ) 30 से 50 वर्ष की उम्र के बीच शुरू होता है , लेकिन यह बचपन में भी हो सकता है। गठिया पुरुषों की तुलना में महिलाओं में ज़्यादा होता है। आमतौर पर गठिया होने से पहले त्वचा रोग (सोरायसिस) दिखाई देते हैं, जो की indicator की तरह काम करता है, की आगे चल कर गठिया होने की संभावना है।

गठिया होने पर क्या नही खाना चाहिए? What not to eat when have arthritis?

गठिया के मरीज को नीचे लिखे खाद्य पदार्थों का सेवन नही करना चाहिए, नही तो उसका दर्द और सूजन और बढ़ जायेगा।

  • फ्राइड और प्रोसेस्ड फूड
  • शुगर और रिफाइंड कार्ब्स
  • दूध
  • शराब और तंबाकू
  • मक्के का तेल
  • बैगन
  • गोभी
  • ज़्यादा नमक नही खाना चाहिए।
  • चना
  • अचार और खट्टे खाद्य पदार्थ

गठिया ( Arthritis ) व्यायाम के बारे में जानें

  1. योग – योग करने से जोड़ों का लचीलापन और गति की सीमा बेहतर होती है।
  2. एक्यूपंचर – इस चिकित्सा में कई प्रकार के दर्द को कम करने के लिए त्वचा के विशिष्ट बिंदुओं पर सुई डाली जाती हैं।
  3. ग्लूकोसेमिन – जिन लोगों को मध्य से तीव्र दर्द होता है, उन्हें यह दवा लेने से आराम मिलता है।
  4. मालिश –  मालिश (यह खून के बहाव को बढ़ा देती है) लेने से , कुछ समय के लिए जोड़ों के दर्द में आराम और गर्माहट मिलती है।

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<strong>I'm Rahul</strong> Founder of <strong>careerjankari.in</strong> , Career jankari is a free Hub for knowledge about different fields of education and current affair news . We first started as a local magazine in 2013 and in 2019 we started our online journey to severe the world with the most and unbiased news & educational Blog .
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